Monday, October 12, 2026
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उत्तराखंड में पर्वतारोहण को नई उड़ान, 83 प्रमुख हिमालयी चोटियां पर्वतारोहियों के लिए खुलीं

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देवभूमि उत्तराखंड ने साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पर्वतारोहण को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद (UTDB) ने वन विभाग के साथ समन्वय कर गढ़वाल और कुमाऊं हिमालय क्षेत्र की 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण अभियानों के लिए पूरी तरह खोल दिया है। यह निर्णय उत्तराखंड को वैश्विक पर्वतारोहण मानचित्र पर एक सशक्त और आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित करेगा।

खोली गई चोटियों की ऊंचाई 5,700 मीटर से 7,756 मीटर तक है। इनमें कामेट (7,756 मीटर), नंदा देवी ईस्ट, चौखंबा समूह, त्रिशूल समूह, शिवलिंग, सतोपंथ, चंगाबांग, पंचचूली और नीलकंठ जैसी विश्व प्रसिद्ध और चुनौतीपूर्ण चोटियां शामिल हैं। ये शिखर तकनीकी कठिनाई के साथ-साथ अपने अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी जाने जाते हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हिमालय हमारी पहचान, विरासत और शक्ति का प्रतीक है। 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण के लिए खोलना राज्य के साहसिक पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। सरकार का उद्देश्य है कि देश के युवा पर्वतारोहण जैसे साहसिक क्षेत्रों में आगे आएं, स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित विकास सुनिश्चित किया जाए।

भारतीय पर्वतारोहियों को बड़ी राहत

अधिसूचित 83 पर्वत चोटियों पर अब भारतीय पर्वतारोहियों को किसी भी प्रकार का अभियान शुल्क नहीं देना होगा। पीक फीस, कैंपिंग फीस और पर्यावरण शुल्क जैसी लागत को राज्य सरकार स्वयं वहन करेगी। इससे आर्थिक कारणों से पीछे रह जाने वाले युवाओं को पर्वतारोहण के नए अवसर मिलेंगे।

विदेशी पर्वतारोहियों के लिए सरल व्यवस्था

विदेशी पर्वतारोहियों पर पहले लगने वाले राज्य स्तरीय अतिरिक्त शुल्क को समाप्त कर दिया गया है। अब उन्हें केवल भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन (IMF) द्वारा निर्धारित शुल्क ही देना होगा। इससे उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय अपील बढ़ेगी और विदेशी अभियानों की संख्या में वृद्धि होगी।

ऑनलाइन अनुमति प्रक्रिया

सभी पर्वतारोहण अभियानों के लिए आवेदन अब उत्तराखंड माउंटेनियरिंग परमिशन सिस्टम (UKMPS) के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। यह व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल होगी, जिससे अनुमति प्रक्रिया में तेजी आएगी।

स्थानीय रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

इस फैसले से सीमावर्ती और दूर-दराज क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी। स्थानीय लोगों को गाइड, पोर्टर, होमस्टे, परिवहन और अन्य सेवाओं के माध्यम से रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। यह पहल पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी सहायक होगी।

सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर जोर

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी पर्वतारोहण अभियानों में सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य होगा। पर्वतारोहियों को “लीव नो ट्रेस” सिद्धांत अपनाना होगा, ताकि हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने देश-विदेश के सभी पर्वतारोहियों का इन हिमालयी शिखरों पर स्वागत करते हुए कहा है कि यह पहल देवभूमि उत्तराखंड की साहसिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला मील का पत्थर साबित होगी।

गौरतलब है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में पहाड़ी राज्यों के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में पर्यावरण-अनुकूल माउंटेन ट्रेल्स विकसित करने की घोषणा की है। यह कदम भारत को विश्व स्तरीय ट्रेकिंग और हाइकिंग गंतव्य बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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